Zakir Khan Shayari – Best Collection Ever

Zakir Khan Shayari – ज़ाकिर खान सबसे लोकप्रिय स्टैंडअप कॉमेडियन, शायर में से एक है और हाँ मोटिवेशनल स्पीकर भी हैं हालाँकि वे इस बात का दवा बिलकुल भी नहीं करते हैं पर उनका जीवन संघर्ष और बातें लोगों को मोटीवेट कर जाती हैं । जाकिर खान युवा पीढ़ी के बीच बहुत लोकप्रिय हैं।

उनका लोकप्रिय वीडियो When I meet Delhi girl और Bhai Tamara Superman और अन्य वीडियो उनकी हास्य और शायरी प्रतिभा दिखा रहे हैं।

गाली या किसी भी गलत शब्द का उपयोग किए बिना उनकी संवाद डिलीवरी और कहानी कहने की शैली उन्हें सभी पीढ़ी को पसंदीदा बनाती है। जाकिर खान का जन्म और पालन-पोषण इंदौर, मध्य प्रदेश में हुआ था। खान ने सितार में डिप्लोमा किया है और कॉलेज ड्रॉपआउट हैं।

उनके पिता इस्माइल खान पहले तबला वादक थे और माता कुलसुम खान एक गृहिणी थीं। उन्होंने नौकरी की तलाश में दिल्ली में बहुत सारी रातें बिताई थीं। लेकिन किस्मत का फैसला उसके लिए कुछ अलग है।

वह न केवल कवि, कलाकार कलाकार, स्टैंड अप कॉमेडियन हैं, बल्कि वे स्वाभिमान, प्रेम, दोस्ती और कई मूल्यों पर बात करते हैं जिनकी समाज में सभी को जरूरत है।

Haq Se Single , Chacha Vidhayak Hain Humare , Kaksha Gyarvi ने ज़ाकिर खान की प्रसिद्धि अलग स्तर तक पहुंचा दी। जहां लोग बहुत ही कम समय में उनकी लेखनी और अभिनय का लोहा मानने लगे।

यहाँ चाचा विधायक हैं हमरे लोकप्रिय वेब श्रृंखला है जो जाकिर खान द्वारा लिखित और बनाई गई थी और यह कॉमेडी से भरपूर थी और सभी को पसंद आई।

जाकिर खान उर्फ रॉनी भैया आपको गुदगुदाने के लिए ‘चाचा विधायक हैं हमारे’ का दूसरा सीजन लेकर लौट आए हैं। ये सीजन शुक्रवार से अमेजन प्राइम वीडियो पर शुरू हो रहा है। शो को लेकर जाकिर खान के प्रशंसकों में खासी उत्सुकता रही है और गुरुवार को शो का ट्रेलर रिलीज होने से इस सीजन को लेकर जाकिर खान के प्रशंसकों का उत्साह और बढ़ गया है।

यहां मैं उनका पहला सबसे लोकप्रिय और मजेदार वीडियो एम्बेड कर रहा हूं Zakir Khan – What happens when you fail in an exam! AIB Diwas. भगवान् न करे कि कोई भी किसी भी इम्तेहान में फ़ैल हो पर अगर फ़ैल हो भी जाए तो ज़खीर खान की इस वीडियो को जरूर देखें कम से कम कुछ समय के लिए ही सही आप फ़ैल होने का गम भूलकर खिलखिलाने को मजबूर हो जायेंगे।

Zakir Khan – What happens when you fail in an exam! AIB Diwas

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Zakir Khan Shayari

ZAKIR KHAN FAMOUS LINES

कोई हक़ से हाँथ पकड़ कर दोबारा नहीं बैठाता ,
सितारों के बीच से सूरज बनने के कुछ अपने ही नुक्सान हुआ करते हैं

लूट रहे थे खजाने माँ बाप की छाँव में,
हम कुड़ियों की खातिर,
घर छोड़ कर आ गए

वो तितली की तरह आई और जिंदगी बाग़ कर गयी ,
वो तितली की तरह आई और जिंदगी बाग़ कर गयी ,
मेरे जितने भी इरादे नापाक उन्हें  पाक कर गयी

ज़िन्दगी से कुछ ज्यादा नहीं बस इतनी सी फरमाइश है ,
अब तस्वीर से नहीं तफसील से मिलने की ख्वाहिश है 

कुछ के जाने का गम है ,
कुछ के होने की तसल्ली है ,
बस इतनी से कहानी है हमारी

दोस्ती आईनो से  कभी लम्बी नहीं चलती ,
इतनी ईमानदारी भी रिश्तों के लिए अच्छी नहीं होती

Ego unme hai, Toh hum Halke hai kya…

If No Kajal Look is Statement, toh Chappal bhi Statement hai…
“Ja… Nahi hounga Taiyar tere liye…”

ZAKIR KHAN SHAYARI ON LOVE

वो अगर हज़ार बार जुल्फें ना संवारे
तो उसका गुजारा नहीं होता
वैसे दिल बहुत साफ है उसका
इन हरकतों का कोई इशारा नहीं होता

हम दोनों में बस इतना  सा फर्क है उसके सब लेकिन मेरे नाम से शुरू होते हैं ,
और मेरे सारे काश उस  आकर रुकते हैं 

इश्क को मासूम रहने दो नोटबुक के आखिरी पन्नो पर ,
आप उसे किताबों में डाल कर मुश्किल ना कीजिए 

एकतरफा प्यार की खूबसूरती ये है
कि आप हर दिन जीतते हो और हर दिन हारते हो

दिल तो रोता रहे ओर आँख से आँसू न बहे
इश्क़ की ऐसी रिवायात ने दिल तोड़ दिया

हर एक कॉपी के पीछे कुछ ख़ास लिखा है ,
बस इस तरह मेरे इश्क का इतिहास लिखा है
तू दुनिया में चाहे जहाँ भी रहे ,
अपनी डायरी में मैंने तुझे पास लिखा है

इम्तेहान ए इश्क का मैंने खूब रिवीज़न कर लिया ,
उसकी याद भी समझ ली ,उसे भूल के भी देख लिया 

ये सब कुछ जो भूल गयी थी तुम या शायद जानकर छोड़ा था तुमने ,
अपनी जान से भी ज्यादा संभाल कर है मैंने सब ,जब आओगी तो ले जाना 

ZAKIR KHAN SHAYARI ON BEWAFAI

ये कुछ सवाल हैं जो सिर्फ क़यामत के रोज पूछूंगा ,
क्योंकि उससे पहले तुम्हारी और मेरी बात हो सके इस लायक नहीं हो तुम 


तेरी बेवफाई की अंगारों में लिपटी रही है रूह मेरी
मैं इस कदर आग न होता जो हो जाती तू मेरी

बेवज़ह बेवफाओं को याद किया है ,
गलत लोगों पर बहुत वक्त बर्बाद किया है

माना की तुमको भी इश्क़ का तजुर्बा कम् नहीं,
हमने भी तो बागो में है कई तितलियाँ उड़ाई…

तुझे खोने का खौफ जबसे निकला है बाहर,
तुझे पाने की जिद भी टिक न सकी दिल में…

ZAKIR KHAN SHAYARI ON SUCCESS

कामयाबी तेरे लिए हमने खुद को कुछ यूं  तैयार कर लिया ,
मैंने हर जगबाट बाजार में रख कर इश्तेहार कर लिया

मेरी ज़मीन तुमसे गहरी है ,
याद रखना मेरा आसमान भी तुमसे ऊँचा होगा

ऐ अदम के मुसाफ़िरो होशियार
राह में ज़िंदगी खड़ी होगी

ZAKIR KHAN SHAYARI INSPIRATIONAL

हर एक दस्तूर से  बेवफाई मैंने शिद्दत से है निभाई ,
रास्ते भी खुद ढूंढे और मंज़िल भी खुद बनाई

अपने आप से भी पीछे खड़ा हूँ मैं
ज़िन्दगी कितना धीरे चला हूँ मैं


यूं तो भूले हैं हमने लोग कई , पहले भी बहुत से 
पर तुम जितना कोई उनमें से याद नहीं आया 

थोड़ा कर्ज़ा किया है
थोड़ा खुद कमाया है
अब तुम ही देख लो अब
एक तुम्हारी स्माइल के पीछे
इतने लोगों का साया है
किसी दिन दिल करे तो
सबके सामने बस हाथ पकड़ लेना
बाकी तो बस मोह माया है


Zakir-Khan-Dialogues
Zakir Khan Dialogues

Zakir Khan Ki Qayamat ki Raat Kavita

मेरे कुछ
सवाल हैं जो
सिर्फ क़यामत के रोज़
पूछूंगा तुमसे
क्योंकि
उसके पहले तुम्हारी और मेरी
बात हो सके
इस लायक नहीं हो तुम।

मैं जानना चाहता हूँ,
क्या रकीब के साथ भी
चलते हुए शाम को यूं हीे
बेखयाली में
उसके साथ भी हाथ
टकरा जाता है तुम्हारा,
क्या अपनी छोटी ऊँगली से
उसका भी हाथ
थाम लिया करती हो
क्या वैसे ही
जैसे मेरा थामा करती थीं
क्या बता दीं बचपन की
सारी कहानियां तुमने उसको
जैसे मुझको
रात रात भर बैठ कर
सुनाई थी तुमने
क्या तुमने बताया उसको
कि पांच के आगे की
हिंदी की गिनती
आती नहीं तुमको
वो सारी तस्वीरें जो
तुम्हारे पापा के साथ,
तुम्हारे भाई के साथ की थी,
जिनमे तुम
बड़ी प्यारी लगीं,
क्या उसे भी दिखा दी तुमने

ये कुछ सवाल हैं
जो सिर्फ क़यामत के रोज़
पूँछूगा तुमसे
क्योंकि उसके पहले
तुम्हारी और मेरी बात हो सके
इस लायक नहीं हो तुम

मैं पूंछना चाहता हूँ कि
क्या वो भी जब
घर छोड़ने आता है तुमको
तो सीढ़ियों पर
आँखें मीच कर
क्या मेरी ही तरह
उसके भी सामने माथा
आगे कर देती हो तुम वैसे ही,
जैसे मेरे सामने किया करतीं थीं
सर्द रातों में, बंद कमरों में
क्या वो भी मेरी तरह
तुम्हारी नंगी पीठ पर
अपनी उँगलियों से
हर्फ़ दर हर्फ़
खुद का नाम गोदता है,और क्या तुम भी
अक्षर बा अक्षर
पहचानने की कोशिश
करती हो
जैसे मेरे साथ किया करती थीं

मेरे कुछ सवाल हैं
जो सिर्फ क़यामत के रोज़
पूछूगा तुमसे
क्योंकि उसके पहले
तुम्हारी और मेरी बात हो सके
इस लायक नहीं हो तुम।

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