शिक्षाप्रद कहानी हिंदी में – सफलता का रहस्य { Shikshaprad Kahani Hindi Mein-Saphalata Ka Rahasy }

शिक्षाप्रद कहानी हिंदी में – सफलता का रहस्य

Shikshaprad Kahani Hindi Mein-Saphalata Ka Rahasy – इस शिक्षाप्रद कहानी में ये बताने की कोशिश की गयी है कि ज्यादातर लोग उपयुक्त समय की तलाश में सफलता से वंचित रह जाते हैं पर जो लोग सफलता का रहस्य जानते हैं वो किसी भी अवसर का इन्तजार नहीं करते बल्कि अपनी मेहनत से किसी भी अवसर पर सफलता अर्जित करते हैं। जो लोग सही अवसर का इंतजार करते रहते हैं वो लोग समय गुजर जाने पर दूसरों को दोष देने लगते हैं। इसलिए अगर आप भी सफल होना चाहते हैं तो सही अवसर का इन्तजार न करें बस पूरी लगन और मेहनत से सफलता प्राप्त करने का प्रयास करें। क्योंकि जो लोग सिर्फ सही अवसर का इंतजार करते रहते हैं उन्हें बहुत बार खाली हाथ वापस आना पड़ता है।

कहानी – सफलता का रहस्य

एक प्रचलित कथा के अनुसार पुराने समय में एक व्यक्ति को जीवन में लगातार असफलताएं मिल रही थीं। वह दुखी था। मानसिक तनाव की वजह से उसका मन अशांत हो गया था। वह कम मेहनत में ज्यादा बड़ा लाभ पाना चाहता था। एक दिन उसके क्षेत्र में प्रसिद्ध संत आए। संत के पास गांव के लोग अपनी-अपनी समस्या लेकर पहुंच रहे थे। वह दुखी व्यक्ति भी संत के पास गया। व्यक्ति ने संत से कहा कि गुरुदेव मैं कम समय में सबसे आगे पहुंचना चाहता हूं, मैं नीचे शुरू नहीं करना चाहता।

मुझे कोई ऐसा मार्ग बताएं जिससे मैं जल्दी ही मेरे लक्ष्य तक पहुंच सकूं। व्यक्ति की बात सुनकर संत ने कहा कि ठीक है मैं तुम्हें मार्ग बता दूंगा, लेकिन इससे पहले तुम्हें मेरा एक काम करना होगा। व्यक्ति ने कहा कि ठीक है, बताइए मुझे क्या करना है? संत बोले कि मेरे बाग में से सबसे सुंदर फूल तोड़कर ले आओ, लेकिन ध्यान रखना एक बार आगे निकल जाओ तो पीछे पलट कर फूल नहीं तोड़ना है। व्यक्ति संत की आज्ञा का पालन करने के लिए तैयार हो गया।

उसने कहा कि मैं अभी फूल ले आता हूं, ये तो छोटा सा काम है। वह व्यक्ति संत के बाग में गया तो उसे पहला ही फूल बहुत सुंदर लगा, लेकिन उसने सोचा कि आगे इससे भी सुंदर फूल मिलेंगे। लड़का आगे बढ़ने लगा। उसे बाग में एक से बढ़कर एक सुंदर फूल दिख रहे थे, लेकिन वह सबसे अच्छा फूल देखने के लिए आगे बढ़ता रहा। जब वह बाग के अंत में पहुंचा तो वहां सिर्फ मुरझाए हुए और बेजान फूल थे। ये देखकर व्यक्ति निराश हो गया।

संत की शर्त के अनुसार पर पीछे पलट नहीं सकता था। उसने मुरझाए फूल नहीं तोड़े और खाली हाथ ही संत के पास पहुंच गया। संत ने व्यक्ति से पूछा कि तुम फूल लेकर नहीं आए? व्यक्ति ने जवाब दिया कि महाराज में बाग में फूल तो बहुत अच्छे-अच्छे थे, लेकिन मैं सबसे सुंदर फूल लेकर आना चाहता था। इसीलिए अच्छे फूलों को छोड़कर आगे बढ़ता रहा। बाग के अंत में तो सभी फूल मुरझाए हुए थे, इस वजह से मैं खाली हाथ आ गया।

शिक्षा:-

मित्रों! हमारे जीवन में भी ऐसा ही होता है। इसीलिए जैसे ही कोई अच्छा अवसर मिले, उसका उपयोग कर लेना चाहिए। ज्यादा अच्छे अवसर के चक्कर में हाथ आए अवसर को नहीं छोड़ना चाहिए। वरना अंत में खाली हाथ लौटना पड़ता है। किसी भी काम में सफलता के लिए मेहनत तो करनी ही पड़ती है। कम समय में ज्यादा सफलता पाने का मोह में कई बार हम अच्छे अवसर छोड़ देते हैं और बाद में परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

तो दोस्तों कैसी लगी हमारी ये आज की छोटी सी शिक्षाप्रद कहानी “सफलता का रहस्य” अगर आपको ये कहानी पसंद आयी हो तो इसको अपने दोस्तों और अपने घर के छोटे बच्चों के साथ अवश्य शेयर करें।

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